“खेला होबे” नारा तृणमूल कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत का एक प्रमुख कारण बना जिसे देखते हुए पश्चिम बंगाल की आलाकमान ने खेला होबे दिवस मनाने की घोषणा की

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चुनाव में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाले चुनावी नारे विरोधी पार्टी का मनोबल कम करने के लिए बनाए और लगाए जाते हैं।
यही एक जरिया होता है जिससे कम शब्दों में विरोधी पार्टी का विरोध किया जाता है और इस बार विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए नारे खेला होबे खूब प्रचार में था। अब ममता बनर्जी ने खेला होबे दिवस मनाने की घोषणा की है ।

चुनावी नारे को अब ममता बनर्जी दिवस का रूप देने जा रही है चुनाव के समय ममता बनर्जी ने खेलो होबे का नारा दिया और यह खूब सराहा गया। जिसको देखते हुए ममता बनर्जी ने खेला होबे दिवस मनाए जाने का विचार किया है।

भाजपा पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने भाजपा की मदद नहीं की होती तो वह 30क्षसीटें भी नहीं जीत पाते। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर तीसरी बार मुख्यमंत्री का कमान संभालने वाले ममता बनर्जी और भाजपा के बीच मनमुटाव खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है।

ममता बनर्जी ने कहा है कि अब हम खेला होबे दिवस मनाएंगे इसी के के विपरीत ममता बनर्जी ने भाजपा विधायक को शिष्टाचार और शालीनता नहीं जाने पर निशाना साधा और कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ के अभिभाषण के दौरान हुए हंगामे से यह बात जाहिर हो जाती है।

विधानसभा में भाजपा सदस्यों के शोर-शराबे के बीच 18 पन्नों के अभिभाषण की कुछ पंक्तियां भी लिखिए और लिखित भाषण सदन के पटल पर रखा। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सदन में अपने भाषण में कहा कि भाजपा विधायक और मंत्री अपने शालीनता और सभ्यता भूल गए हैं। मैं और भी भाजपा नेता जैसे राजनाथ और सुषमा स्वराज जैसे नेताओं से भी मिली हूं लेकिन यह भाजपा नेता कुछ अलग ही हैं इनके अंदर संस्कृति और सभ्यता है। राजनीति अपनी जगह होती है लेकिन अपनी भाषा की शालीनता होना बहुत जरूरी है जो भाजपा नेता अपनी जीत के कारण भूल गए हैं।

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