जाने वट सवित्री का पूजन की विधि , लाभ , इस पूजन का मुहूर्त , और कुछ अन्य जरुरी बातें ।

भारत देश एक धर्मिक देश है यह हम सब लोग जानते है । यहाँ पर भिन्न भिन्न  प्रकार के पूजा और व्रत रखा जाता है । ऐसे ही हमारे देश में जून के महीने में एक व्रत होता है जो की  हिंदी पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष के अमावश्या के दिन मनाया जाता है तो आइये जानते है इसके पूजा की विधि और कब है इसका शुभ मुहूर्त क्योकि 10 जून को ही लग रहा है  01:30 मिनट से लगेगा राहुकाल और राहुकाल के साथ साथ इन मुहूर्त में भी नहीं किया जाता वट सावित्री व्रत की पूजा तो आइये जानते है किन मुहूर्तो में नहीं क्या जाता यह व्रत ।

इन मुहूर्त में ना करें वट सावित्री व्रत की पूजा-

यदि आप यह पूजा करते है तो अवश्य जाने की इन मुहूर्त में वट सावित्री व्रत की पूजा नहीं की जाती ही । ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल, यमगण्ड. आडल योग, दुर्महूर्त और गुलिक काल को शुभ योगों में नहीं गिना जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है।

राहुकाल- 01:30 PM  से 03:13 PM  तक।
यमगण्ड- 04:57 AM से 06:40 AM तक।
आडल योग- 04:57 AM से 11:45 AM तक।
दुर्मुहूर्त- 09:31 AM  से 10:25 AM तक।
गुलिक काल- 08:22 AM  से 10:05 AM तक।

वट सावित्री व्रत के पूजा में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्री।

वट सावित्री व्रत की पूजन सामग्री में सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां, धूप, दीप, घी, बांस का पंखा, लाल कलावा, सुहाग का समान, कच्चा सूत, चना (भिगोया हुआ), बरगद का फल, जल से भरा कलश आदि शामिल करना चाहिए।

वट सावित्री व्रत के पूजा की विधि। 

वट सावित्री व्रत एक ऐसा व्रत जो की हिन्दू धर्म के लिए पवित्र माना गया है । इन दिनों सभी स्त्रियां अपने पति के लिए और अपने पुत्र के लिए व्रत रखती है । यदि आप पहली बार यह व्रत रख रही है तो आप पूजा की विधि जान लीजिये इस दिन औरतें बरगद के वृक्ष की पूजा करती है और फेरे लगा के पति के लम्बी आयु की कामना करती है ।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पति को लंबी आयु मिलती है। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। इस व्रत की पूजा की विधि  यह है । पूजा के समय वट वृक्ष पर रोली और अक्षत चढ़ाकर कलावा बांधती हैं। महिलाएं हाथ जोड़कर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। इस दिन महिलाएं पूजन सामग्री के तौर पर सिंदूर, दर्पण, मौली, काजल, मेहंदी, चूड़ी, माथे की बिंदी, साड़ी और सात तरह का अनाज और सत्यवान सावित्री की प्रतिमा को शामिल करती हैं

 

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