तीन बार हो चुकी यौन शोषण का शिकार फिर भी नहीं हुई ज़िन्दगी से निराश… 30 लाख का स्कॉलरशिप लेकर अमेरिका पहुंचीं श्वेता

श्वेता कट्टी का जन्म मुंबई के एक रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा में हुआ इसी बस्ती में वह पली-बढ़ी हैं।कमाठीपुरा एशिया का जाना माना रेड लाइट एरिया है। श्वेता अपनी तीन बहनों में सबसे छोटी हैं वह जगह भले ही पढ़ाई और बड़े सपने देखने के अनुकूल नहीं थी लेकिन फिर भी श्वेता के आंखों में सपने हजार पनप रहे थे और उन सपनों को पूरा करने की हिम्मत भी श्वेता बचपन से ही अपने अंदर इकट्ठा कर रही थी। भले ही श्वेता का बचपन सेक्स वर्कर्स के बीच गुजरा लेकिन उनके अंदर पढ़ने लिखने के जज्बात कमी कम नहीं हुआ। श्वेता जिस एरिया से थी वहां पर पढ़ाई लिखाई का कोई भी माहौल नहीं था।

तीन बार यौन शोषण शिकार

कमाठीपुरा में रह रही श्वेता का परिवार उनकी मां की कमाई से चलता था। काफी समय तक श्वेता एक फैक्ट्री में काम किया करती थी। श्वेता के पिता भी थे लेकिन वह तो सौतेले और दूसरे शराबी थे। जो हमेशा घर पर मार पिटाई और झगड़ा करते थे। श्वेता अपने घर में अपने आप को सुरक्षित नहीं महसूस करती थी। बचपन से ही उन्होंने इतनी यातनाएं झेली थी कि वह वहां के माहौल से निकलना चाहते थे क्योंकि वहां किसी भी महिला या लड़कियों का रहना सुरक्षित नहीं था। खुद श्वेता बचपन में ही 3 बार यौन शोषण का शिकार हो चुकी थी। मात्र 9 साल की उम्र में श्वेता को उनके एक करीबी कि गलत हरकते सहनी पड़ी।श्वेता को अपने रंग के लिए भी काफी मजाक बनना पड़ता था।

क्रांति नामक एनजीओ से मिली नहीं राह

श्वेता भले ही ऐसी एरिया से थी जहां महिलाओं को कुछ कर गुजरने की आजादी नहीं थी फिर भी श्वेता के अंदर आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं थी। इतना कुछ सहते हुए भी वह अंदर से कमजोर नहीं हूं और उन्होंने इस माहौल से निकलने के लिए अपने मन में दृढ़ संकल्प कर लिया। 16 साल की श्वेता ने अपने क्षेत्र में क्रांति नामक एक एनजीओ ज्वाइन किया। यहीं से उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया इस संस्था ने उन्हें खुद से प्यार करना सिखाया और इस संस्था की मदद से वह खुद को अन्य लड़कियों की तरह महसूस करने लगी। और यह एनजीओ उन्हें उनकी जिंदगी की नई राह दिखाएं।

श्रेष्ठ 25 महिलाओं में चुनी गई श्वेता

श्वेता के प्रयासों से प्रभावित होकर अमेरिकी मैगजीन न्यूज़ विक ने 2013 में उनके अपने अप्रैल अंक में 25 साल से कम उम्र की महिलाओं की सूची में शामिल किया जो समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनी। इस सूची में पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई का भी नाम था।

श्वेता ने वह कर दिखाया जो उन्होंने कभी सोचा नहीं था और जिसकी हिम्मत उनको क्रांति एनजीओ से मिली अमेरिका के 10 सबसे महंगे कालेजों में से एक जाने-माने बोर्ड कॉलेज की 4 साल स्नातक डिग्री की फीस लगभग ₹30 लाख श्वेता को पढ़ने के लिए 28 लाख की छात्रवृत्ति मिली।

ऐसे मिली छात्रवृत्ति

श्वेता की लगन और अथक प्रयास के कारण उन्हें इंटरनेशनल इंटरनेट पर अमेरिकी विश्वविद्यालय के बारे में सर्च किया इसी तरह उनकी वार्ड कॉलेज के एक पूर्व छात्र श्वेता से इतना प्रभावित हुआ कि उसने कॉलेज में श्वेता के नाम की सिफारिश कर दी। उस समय श्वेता अपने सपनें के लिए आगे बढ़ रही थी। श्वेता कॉलेज के एडमिशन अफसरों का दिल छू लिया। बाकी का म्यूजिक पत्रिका ने कर दिया। 25 महिलाओं में चुना गया श्वेता का नाम। श्वेता काफी खुश हुए और उन्होंने अपने आगे की पढ़ाई जारी रखी।

श्वेता आज उन तमाम लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है जो उस रेड लाइट में रहते हुए अपने आत्म सम्मान को खो देते हैं और वहां के दलदल से निकलने का प्रयास नहीं कर पाती है।

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