सूरत में एक शख्स अब तक 3000 बेसहारा बेटियों की शादी करवा चुका है। असली अमीर ऐसा होता है

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Surat, Gujarat: आपने बहुत रईस बहुत बड़े पैसे वालों को देखा होगा ज़्यादा पैसे कमाने के बाद लोग नीचे के लोगों से बात करना तक बंद कर देते हैं ऐसा हज़ारों कहानियों में देखा गया है और ऐसा सच भी है. लेकिन ये उन लोगों पर निर्भर करता है जो ऐसे मानशिक प्रवित्ति के होते हैं जिन्हें वैसे से ज़्यादा मोहब्बत होती है या उनका ऐसा मानना होता है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई किसी और पर क्यों लुटाएं लेकिन आज की कहानी थोड़ा अलग है।

यह व्यक्ति अपने आपमे पूज्नीय है। ये शख्स ऐसा है, जिसने अभी तक दिवाली के अवसर पर अपने कर्मचारियों को तोहफा के रूप पर कार और घर देने वाले ‘सावजी ढोलकिया’ के बारे में सुना होगा। लेकिन अब सुरत के एक हीरा कारोबारी अपने अच्छे कामों के लिए चर्चा में छाए रहते हैं। इस शख्स का नाम “महेशभाई सवाणी” है, जो बेसहारा लड़कियों की शादी करवाते हैं।

आज तक वह 10 वर्षो में 3000 से ज़्यादा बेटियों की शादी करा चुके हैं। उन्होंने रविवार को एक साथ 231 बेसहारा बेटियों की शादी कराई। उन्होंने अपने क्रम को जारी रखते हुए लगातार 10वें साल भी सामूहिक शादी कराई। अभी तक की गिनती गिने तो वह लगातार 10 साल में 3,097 बेटियों की शादी करवा चुके हैं। इतना ही नही वे बेसहारा बेटियों के भविष्य की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाते हैं।

महेशभाई की जिम्मेदारी शादी तक ही नही, बल्कि शादी के बाद भी उनके भविष्य को उज्जव बनाने की कामना करते है। उनका कहना है कि कि शादी के बाद इन बेसहारा बेटियों के भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उनकी है। उन्होंने बताया कि बेटियों की सभी आवश्यकता, उनके बच्चों के जन्म, इलाज, कपड़ा, मकान, पढ़ाई इन सब के लिए जो भी आर्थ‍िक मदद की आवश्यकता होगी वो भी मेरी जिम्‍मेदारी है।

इतना ही काफी नही है अगर इनमें किसी लड़की की छोटी बहन है तो उसकी भी जिम्मेदारी महेशभाई ही अपने कंधों पर उठाते हैं। वह पूरा प्रयास करते हैं शादी के बंधन में बंधे इन जोड़ों को सभी गवर्मेंट स्क्रीम का फायदा मिल सके। महेशभाई सभी को अपनी बेटी मानते हैं और बेटी के पति मतलब अपने दामाद के रोजगार के लिए भी पूरी सहायता महेशभाई ही करते हैं।

महेशाभाई इस साल से एक इमरजेंसी फंड बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें हर बेटी के पति को 500 रुपये महीना जमा करना होगा। इस तरह उनकी योजना के सफल प्रयास से तीन हजार से ज्यादा दामाद से हर महीने 15 लाख रुपये से अधिक जमा हो जाएंगे। भविष्य में यदि किसी बेटी के परिवार पर कोई परेशानी या कठिनाई आती है, तो इस तरह जमा किये हुए रुपये को वहीं खर्च किया जाएगा। जिससे किसी भी बेसहारा की मदद की जा सकेगी।

हर महीने जमा होने वाले इस पैसे का पूरा लेखा या हिसाब-किताब भी सारे दामाद मिलकर देखेंगे। इस शख्स की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। महेशभाई ने रविवार को होने वाले विवाह समारोह को ‘लाडली’ का नाम दिया। महेशभाई को एक साल पहले कचरा के डिब्बे में पड़ी एक नवजात बच्ची मिली थी। यह विवाह समारोह उन्‍होंने इसी भूमि नाम की बेटी को समर्पित किया। महेशभाई ने बेसहारा बेटियों को गोद लेने के लिए लाइसेंस का भी आवेदन दिया है। हर कोई पैसे कमाता है और कुछ लोग महेशभाई जैसे होते हैं जिन्हें अपने साथ साथ समाज की भी चिंता होती है दुनिया मे ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं जो दूसरों की खुशी का भी उतना ही ख्याल रखते हैं जितना अपने या अपनों का।

 

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