राम मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या जमीन सौदे में घपले के आरोप की जांच कराई तो ये बात सामने आयी।

RAM MANDIR

27 साल विवाद चलने के बाद जिस सरकार में ये मुद्दा बनाया गया था उसी सरकार के कार्यकाल में इस मुद्दे को खत्म करते हुए मंदिर के निर्माण कार्य करने की मंजूरी मिली लेकिन कमेटी के बारे में बताया जा रहा है कि कैसे 2 मिनट में मंदिर के नाम पर खरीदी हुई जमीन 2 करोड़ से (18.5 करोड़) साढ़े अट्ठाराह करोड़ हो जाती है।

अयोध्या के राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर पिछले महीने ज़मीन खरीद में अनियमितता के आरोप लगे थे. आरोप लगे कि 2 करोड़ रुपये की ज़मीन को ट्रस्ट ने मिनटों के अंदर साढ़े 18 करोड़ रुपये में खरीद लिया. अब मंदिर ट्रस्ट ने इस बारे में अपनी जांच पड़ताल के बाद खुद को क्लीन चिट दे दी है. दावा किया है कि जमीन सौदे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई.

इस मामले को लेकर ट्रस्ट के सदस्यों की तीन दिन तक बैठक हुई. इसके बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने 1 जुलाई को मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि

“कोषाध्यक्ष होने के नाते मैंने खोजबीन की. साथ में वकील, लेखपाल और सीए भी थे.खोजबीन में निकलकर आया है कि जमीनों की खरीद में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है. आरोप लगाने वालों को हम चुनौती देते हैं कि आप अयोध्या आइए और जितनी ज़मीन ली गई है, उतनी ज़मीन उससे कम कीमत पर लेकर दिखाइए. हम आपसे खरीद लेंगे.”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, गोविंद देव गिरी ने कुछ और भी बातें कहीं-

#भूमि अधिग्रहण के लिए हुई खरीद में अवैधानिक कुछ भी नहीं है. सारे भूखंडों का अधिग्रहण अयोध्या के बाजार मूल्य से कम पर ही किया गया. ऐसे आरोप लगाने वाले लोग मंदिर निर्माण में बाधा डालना चाहते हैं.
# हम रामभक्तों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि न कुछ गलत हुआ है, न आगे कुछ गलत होगा. हम गर्व से निर्माण पूरा करने का काम करेंगे.

#आरोप लगाने वालों के मन में राम जी के प्रति आदर होता तो वे सीधे हमारे पास आ सकते थे. हमसे सवाल कर सकते थे लेकिन नैतिकता खोकर मीडिया में आकर दुष्प्रचार किया गया. इसके पीछे राजनैतिक भावना है.

#हमसे कोई भी अथॉरिटी कुछ भी पूछेगी तो हम उसका सटीक जवाब देंगे. दस्तावेज भी दिखाएंगे. लेकिन मीडिया ट्रायल नही करेंगे.

क्या आरोप लगे थे?

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और सपा नेता पवन पांडेय ने 13 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. वे एक जमीन के बैनामे के कागज और एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के कागज लेकर आए थे. इसे दिखाते हुए पवन पांडेय ने दावा किया कि ट्रस्ट के लिए जमीन जिस दिन खरीदी गई थी, उसी दिन जमीन खरीदे जाने से महज 10 मिनट पहले ही इसी जमीन का दो करोड़ में बैनामा हुआ था. और फिर उसी दिन इसी जमीन का साढ़े 18 करोड़ में ट्रस्ट के नाम एग्रीमेंट कर दिया गया. इसी के आधार पर पवन पांडेय ने सवाल उठाए कि जिस जमीन का 10 मिनट पहले दो करोड़ रुपये में बैनामा हुआ, उसका 10 मिनट बाद साढ़े 18 करोड़ रुपये में एग्रीमेंट कैसे हो गया. यानी 10 मिनट में जमीन की कीमत साढ़े 16 करोड़ रुपये कैसे बढ़ गई?

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इसी तरह के आरोप लगाए. राम मंदिर ट्र्स्ट की ओर से गड़बड़ियों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया. अब एक बार फिर ट्रस्ट ने पूरी तरह जांच पड़ताल के बाद इन जमीन सौदों में खुद को क्लीन चिट दे दी है. हालांकि इसके अलावा 8 करोड़ रुपये में खरीदी गई एक दूसरी जमीन पर भी सवाल उठे थे. उस पर अभी ट्रस्ट ने कुछ नहीं कहा है.

आप अपना जवान हमें कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं कि क्या आप भी मंदिर की खरीदी हुई ज़मीन को लेके सीबीआई जांच चाहते हैं अगर हां तो कॉमेंट बॉक्स में हमें ज़रूर बताएं हम आपके जवाब का इंतेज़ार करेंगे।

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