राष्ट्रपति बोले- हमें 5 लाख मिलता है तो पौने 3 लाख टैक्स जाता है, हमसे ज्यादा बचत तो टीचर की होती है।

ramnath

कानपुर- राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद पदभार संभालने के बाद पहली बार कानपुर जिले में अपने पैतृक गांव परौंख जा रहे हैं। कानपुर देहात जिले के झीझक रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार शाम 6 .10 बजे राष्ट्रपति की स्पेशल ट्रेन पहुंची। यहां झीझक में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि मैं आप सबका आशीर्वाद लेने आया हूं। मुझे इस रेलवे स्टेशन का हर लम्हा याद है। राष्ट्रपति ने अपने अंदाज में कहा कि लोग कहते हैं कि जब मैं सांसद था तो यहां (झीझक रेलवे स्टेशन ) कई ट्रेनें रुकती थीं लेकिन बाद में बंद हो गईं। संभवत कोरोना के चलते ऐसा हुआ होगा। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में सभी ट्रेनों का ठहराव फिर से हो जाएगा।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोगों से कहा कि मेरी आपसे दूरी नहीं है। प्रोटोकॉल के तहत कुछ दूरी है। आप अपनी बात, शिकायत हम तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में आजादी के बाद बहुत विकास हुआ है। ऐसे में हम सबका भी दायित्व है कि विकास में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि कई बार देखा गया है कि कुछ लोग धरना-प्रदर्शन करने के दौरान ट्रेनों को रोकते हैं, कहीं-कहीं ट्रेन में आग भी लगा देते हैं। जो कि एकदम गलत है। क्षणिक आवेश में उठाया गया ऐसा कदम कहीं ना कहीं हमारे ऊपर ही प्रभाव डालता है।

टीचर्स को सबसे ज्यादा वेतन

राष्ट्रपति कोविंद ने अपने अंदाज में कहा कि सबसे ज्यादा वेतन देश के राष्ट्रपति को मिलता है। हमें भी 5 लाख मिलता है, जिसमें पौने 3 लाख टैक्स में चला जाता है। तो बताइये बचा कितना? और जितना बचा उससे कहीं ज्यादा तो हमारे अधिकारी और अन्य दूसरे लोगों को मिलता है। यहां जो टीचर्स बैठे हुए हैं उन्हें तो सबसे ज्यादा मिलता है।

राज्यपाल और सीएम योगी राष्ट्रपति का करेंगे स्वागत

उधर, यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार शाम को कानपुर पहुंचे। राज्यपाल और सीएम योगी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कानपुर आगमन पर उनका स्वागत करेंगे। शाम 7:45 बजे राष्ट्रपति की स्पेशल ट्रेन कानपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगी।

यह है पूरा प्रोग्राम

रास्‍ते में इन मित्रों से मिलने के बाद राष्‍ट्रपति कोविंद आज कानपुर पहुंचेंगे और अगले दिन अपने पुराने परिचितों से मिलेंगे। इसके बाद राष्‍ट्रपति अपने पैतृक गांव परौंख और कस्‍बा पुखरायां हेलिकॉप्‍टर के जरिए जाएंगे। 27 जून को वहां उनके सम्‍मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। वहां से 27 को ही वह वापस कानपुर आ जाएंगे। यहां रात में रुकने के बाद 28 जून की सुबह वह अपनी खास प्रेजिडेंशियल ट्रेन से लखनऊ के लिए रवाना होंगे। लखनऊ में वह दो दिन रुक कर 29 जून की शाम को एयरफोर्स के विमान से दिल्‍ली पहुंचेंगे।

राष्‍ट्रपति भवन की ओर से बताया गया कि राष्‍ट्रपति की अपने पैतृक गांव जाने की योजना काफी समय से थी लेकिन महामारी की वजह से ऐसा न हो सका। भारत के राष्‍ट्रपति देश की जनता से मिलने के लिए ट्रेन का इस्‍तेमाल करते आए हैं। राष्‍ट्रपति कोविंद भी उसी परंपरा का पालन कर रहे हैं।

परंपरा का पालन कर रहे कोविंद

15 वर्षों बाद देश को कोई राष्‍ट्रपति ट्रेन से सफर कर रहा है। इससे पहले राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम साल 2006 में इंडियन मिलिटरी अकैडमी की पासिंग आउट परेड में हिस्‍सा लेने के लिए दिल्‍ली से देहरादून गए थे। देश के पहले राष्‍ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भी अकसर ट्रेन यात्रा करते थे। राष्‍ट्रपति बनने के बाद वह बिहार के सीवान जिले में स्थित अपने पैतृक गांव जीरादेई गए थे। उन्‍होंने छपरा से जीरादेई के लिए स्‍पेशल प्रेजिडेंशियल ट्रेन पकड़ी और वहां तीन दिन रहे।

पूरे रास्‍ते में चाक चौबंद सुरक्षा व्‍यवस्‍था

राष्ट्रपति की प्रेजीडेंशियल स्पेशल ट्रेन आने से पहले राज्य प्रशासन और रेलवे पूरे कानपुर रूट की सुरक्षा चाक चौबंद कर रहा है। इसके लिए गुरुवार को रेलवे, जीआरपी और पुलिस कमिश्नरेट के अफसरों ने दृष्टि निरीक्षण यान से लखनऊ से कानपुर ब्रिज तक निरीक्षण किया। यह यान अत्याधुनिक कैमरों से भी लैस है। इसके जरिए पटरियों के दोनों ओर रेकॉर्डिंग भी की गई।

दिल्ली से कानपुर तक रेलवे लाइन के दोनों ओर पुलों, नालों और झाड़ियों के आसपास सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। इसके बाद 28 जून को कानपुर से लखनऊ आने के दौरान भी पूरे रेलखंड पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। इसके मद्देनजर गुरुवार को अफसरों से चारबाग स्टेशन से कानपुर गंगा पुल तक दोनों लाइनों का जायजा लिया गया। सुरक्षा टीम की अगुवाई एसपी रेलवे सौमित्र यादव ने की।

कितना अच्छा लगता है जब हम अपने जीवन में कुछ बड़ा प्राप्त करके अपने घर आने गॉंव वापस जाते हैं अपने लोगों से मिलते हैं फक्र से उनका सीना चौड़ा हो जाता है ये वही वक़्त होता है जब लोग हम पर गर्व करते हैं और ऐसा करने के लिए कितनी मेहनत का सामना करना पड़ता है आप सबको ये अच्छे से पता है।

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