नासा के सैटेलाइट के आकड़ों के उपयोग से वैज्ञानिकों को मिली नई उपलब्धि…..

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वैज्ञानिकों ने नासा के सैटेलाइट के आंकड़ों का नया उपयोग खोज निकाला है। इस सैटेलाइट के प्रयोग से महासागरों में घूम रहे माइक्रोप्लास्टिक का पता लगाएंगे और लाखों टन के प्लास्टिक कचरे को महासागरों से निकालने का प्रयास करेंगे। महासागरों में किसी वस्तु का पता लगाना बड़ा है मुश्किल कार्य होता है लेकिन यह सैटेलाइट के आंकड़ों की मदद से शोधकर्ता उस समय से निगरानी करेंगे जब महीन प्लास्टिक महासागरों में प्रवेश करेगें। और प्लास्टिक की स्थिति को जानेंगे।
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सैटेलाइट का नाम और कार्य

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के वैज्ञानिकों की इस तकनीक में वैज्ञानिक नासा के साइक्लोन ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम से जमा किए गए आंकड़ों का प्रयोग करेंगे। आठ सैटेलाइट समूह राडार का उपयोग करते हुए वह यह भी पता लगाएंगे कि दुनिया में तूफानों की ताकत और हवा की गति कितनी है।

क्या है? माइक्रोप्लास्टिक

आंकड़ों की माने तो अलग-अलग जगहों से 80 लाख टन के लगभग प्लास्टिक महासागरों में पहुंच रहे हैं और यह प्लास्टिक सूर्य और समुद्री लहरों के कारण माइक्रोप्लास्टिक में बदल रहे हैं और यह माइक्रोप्लास्टिक समुंद्री जीव के लिए बहुत ही हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं। माइक्रोप्लास्टिक हजारों मील का सफर तय करते रहते हैं, जिसके कारण इन्हें पकड़ना या हटाना बड़ा ही मुश्किल होता हैं।

माइक्रोप्लास्टिक पर मौसम का प्रभाव

शोधकर्ताओं का मानना है कि माइक्रोप्लास्टिक पर मौसम का बहुत ही बड़ा असर पड़ता है। माइक्रोप्लास्टिक मौसम के हिसाब से अपनी मात्रा को बढ़ाते हैं यह गर्म स्थलों जैसे उत्तरी गोलार्ध, उत्तरी अटलांटिक और प्रशांत महासागर में अपनी मात्रा बढ़ा लेते हैं। जून और जुलाई इनकी मात्रा को बढ़ाने का सबसे अच्छा महीना होता है। पेसिफिक गार्बेज पैच के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थिति जून और जुलाई में करेक्शनप

किस स्थान पर ज्यादा जमा होते हैं माइक्रोप्लास्टिक और क्यों

कन्वर्जेंस जोन में माइक्रोप्लास्टिक ज्यादा इकट्ठे होते हैं क्योंकि महासागरों की धाराओं और भवरों के पानी के बहाव के साथ एक स्थान पर ज्यादा इकट्ठा हो जाते हैं।

मौसम के अनुसार माइक्रो प्लास्टिक की मात्रा

मौसम के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा घटती और बढ़ती है। गर्म मौसम में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बहुत ही तेजी से बढ़ती है, ठीक उसी तरह ठंडे मौसम में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा घटती है क्योंकि तेज धाराएं माइक्रोप्लास्टिक को तोड़ती हैं और लंबवत मिश्रण उन्हें नीचे जमा होने से रुकती हैं। आंकड़ों की मानें तो माइक्रोप्लास्टिक का मुख्य स्रोत यांगत्से नदी का मुहाना है।

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