वैक्सीनशन को लेके कोर्ट ने ऐसा क्या पूछ लिया मोदी सरकार से? जो जवाब देने में आ रही मुश्किलें

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सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से वैक्सीन की खरीद को लेकर सख्त सवाल पूछे हैं. कहा है कि कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पुतनिक वी जैसी कोरोना वैक्सीन की खरीद के बारे में पूरा डेटा कोर्ट को उपलब्ध कराएं. सारे कागजात के साथ बताएं कि वैक्सीन को लेकर सरकार की पूरी पॉलिसी क्या है. कैसे काम कर रही है सरकार वेक्सीन को लेके.

देश में कोरोना संकट पर नियंत्रण पाने के लिए टीकाकरण अभियान जारी है, लेकिन कई जगहों पर वैक्सीन उपलब्ध की कमी की वजह से सेंटर बंद करने पड़े हैं. टीकाकरण को लेकर मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में है. सुप्रीम कोर्ट ने 2 जून को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कोरोना टीकाकरण नीति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी. जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया है मोदी सरकार को.

वैक्सीन के बारे में सबकुछ बताएं क्या है सरकार की नीति

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि वैक्सीन कब-कब खरीदी गईं? टीकाकरण अभियान के पहले तीन चरणों में पात्र व्यक्तियों के मुकाबले टीका लेने वाली आबादी का क्या प्रतिशत रहा? इसमें एक डोज और दोनों डोज ले चुके लोगों के बारे में बताने के लिए कहा है. टीका लगवाने वाली शहरी आबादी की तरह ग्रामीण आबादी के प्रतिशत के साथ आंकड़े मांगे हैं. सरकार से वैक्सीन खरीद को लेकर सिलसिलेवार जानकारी देने को कहा गया है. इन 3 कंपनियों के टीकों के लिए केंद्र सरकार को तीन चीजें बतानी होंगी. पहली, सभी खरीद के आदेशों की तारीखें. दूसरी, हर तारीख के अनुसार ऑर्डर किए गए टीकों की संख्या. और तीसरी, टीका मिल जाने की अनुमानित तिथि क्या थी. ये सारी जानकारी सरकार से कोर्ट ने मांगी जिसके लिए 2 हफ्ते का समय भी कोर्ट ने दिया है सरकार को.

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एलएन राव और एस रविंद्र भट की स्पेशल बेंच ने सरकार से यह भी पूछा कि आखिर देश की पूरी आबादी को टीका लगाने की उसकी योजना क्या है? फेस 1, 2 और 3 के जरिए केंद्र सरकार बाकी बचे लोगों का टीकाकरण कैसे और कब करना चाहती है? पूरी नीति की प्रतिलिपि संलग्न करे सरकार.

ब्लैक फंगस पर भी उठाए सवाल
कोर्ट ने ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमायकोसिस के इलाज में काम आ रही दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी जानकारी मांगी. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हलफनामा दाखिल करते समय सरकार सुनिश्चित करे कि यह पता लगे कि वैक्सीन पॉलिसी को लेकर उसकी पूरी सोच क्या है. इसके लिए सभी संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां और फाइल नोटिंग्स के बारे में भी बताएं. इसीलिए हलफनामा दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया गया है सरकार को.

वैक्सीनेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से ऐसा क्या पूछ लिया कि जवाब देना भारी पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कोरोना संकट में वैक्सीन को लेकर उठाए गए कदमों पर हिसाब मांगा है. पूछा है कि वैक्सीन की सरकार की पॉलिसी क्या है. फोटो- आजतक

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से वैक्सीन की खरीद को लेकर सख्त सवाल पूछे हैं. कहा है कि कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पुतनिक वी जैसी कोरोना वैक्सीन की खरीद के बारे में पूरा डेटा कोर्ट को उपलब्ध कराएं. सारे कागजात के साथ बताएं कि वैक्सीन को लेकर सरकार की पूरी पॉलिसी क्या है.

देश में कोरोना संकट पर नियंत्रण पाने के लिए टीकाकरण अभियान जारी है, लेकिन कई जगहों पर वैक्सीन की कमी की वजह से सेंटर बंद करने पड़े हैं. टीकाकरण को लेकर मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में है. सुप्रीम कोर्ट ने 2 जून को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कोरोना टीकाकरण नीति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी. जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का वक्त दिया है.

वैक्सीन के बारे में सबकुछ बताएं

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि वैक्सीन कब-कब खरीदी गईं? टीकाकरण अभियान के पहले तीन चरणों में पात्र व्यक्तियों के मुकाबले टीका लेने वाली आबादी का क्या प्रतिशत रहा? इसमें एक डोज और दोनों डोज ले चुके लोगों को बारे में बताने के लिए कहा है. टीका लगवाने वाली शहरी आबादी की तरह ग्रामीण आबादी के प्रतिशत के साथ आंकड़े मांगे हैं. सरकार से वैक्सीन खरीद को लेकर सिलसिलेवार जानकारी देने को कहा गया है. इन 3 कंपनियों के टीकों के लिए केंद्र सरकार को तीन चीजें बतानी होंगी. पहली, सभी खरीद के आदेशों की तारीखें. दूसरी, हर तारीख के अनुसार ऑर्डर किए गए टीकों की संख्या. और तीसरी, टीका मिल जाने की अनुमानित तिथि क्या थी.

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एलएन राव और एस रविंद्र भट की स्पेशल बेंच ने सरकार से यह भी पूछा कि आखिर देश की पूरी आबादी को टीका लगाने की उसकी योजना क्या है? फेस 1, 2 और 3 के जरिए केंद्र सरकार बाकी बचे लोगों का टीकाकरण कैसे और कब करना चाहती है?

कोर्ट ने ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमायकोसिस के इलाज में काम आ रही दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी जानकारी मांगी. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हलफनामा दाखिल करते समय सरकार सुनिश्चित करे कि यह पता लगे कि वैक्सीन पॉलिसी को लेकर उसकी पूरी सोच क्या है. इसके लिए सभी संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां और फाइल नोटिंग्स के बारे में भी बताएं. इसीलिए हलफनामा दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया गया है

कोर्ट ने सरकार से ये 10 बड़ी बातें कहीं

1- सबसे जरूरी टास्क है देश की वैक्सीन लगवाने के लिए पूरी जनसंख्या को वैक्सीन उपलब्ध कराना.

2- राज्यों में टीकाकरण के लिए पैसे देने का जो सिस्टम बनाया गया है वह पहली नज़र में मनमाना और अतार्किक है.

3- संविधान के हिसाब से केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन के मामले में पॉलिसी टकराव दिख रहा है.

4- वर्तमान वैक्सीनेशन पॉलिसी को संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार के नजरिए से भी देखना चाहिए.

5- सरकार अपने 35 हज़ार करोड़ रुपए के बजट को 18 से 45 साल आयु वर्ग को वैक्सीन देने के लिए क्यों नहीं खर्च कर सकती?

6- अभी वैक्सीनेशन की जो पॉलिसी है, वह समाज के धनी वर्ग के हितों में है.

7- CoWin में रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने की शर्त की मार हाशिए पर खड़े देश के लोगों पर पड़ेगी.

8- सभी ऐसे डॉक्युमेंट्स पेश करें जिससे सरकार की ऐसी वैक्सीनेशन पॉलिसी को बनाने के पीछे की सोच पता चल सके.

9- वैक्सीनेशन की पॉलिसी का एक बार फिर से रिव्यू करें.

10 सरकार 2 हफ्ते में यह डेटा भी पेश करे कि देश में कितना टीकाकरण हो चुका है और आगे की क्या योजना है.

हाईकोर्ट ने कहा, हत्या का केस चले

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल पूछे तो दिल्ली हाईकोर्ट ने भी वैक्सीन मामले को लेकर सख्त टिप्पणी की. 2 जून को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि फिलहाल देश को वैक्सीन की आपात जरूरत है. ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए था. कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि कोरोना वैक्सीनेशन के प्रोसेस को धीमा करने के लिए किसी को तो हत्या जैसे अपराध का दोषी मानना ही पड़ेगा. जस्टिस मनमोहन और नाजिम वजीरी की बेंच ने कहा कि

आप वैक्सीन के अभाव में होने वाली मौतों के लिए किसी को क्या जवाब देंगे. जरूरी स्रोतों को दबाकर बैठे अधिकारियों पर ‘हत्या’ का केस चलना चाहिए. पूरे देश में इसे लेकर गंभीर बेचैनी है. हर किसी को वैक्सीन चाहिए. आपको इस प्रक्रिया को छोटा करके किसी भी हाल में वैक्सीन उपलब्ध करानी होगी ताकि पूरा देश सुरक्षित रह सके.

वेक्सीन की कमी को पूरी नहीं कर पा रही सरकार?
बता दें कि देश भर के राज्य वैक्सीन की कमी से जूझ रहे हैं. कई जगह लोग अपनी दूसरी डोज़ के लिए परेशान हैं तो कई जगह 18 साल से ऊपर वालों के लिए वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं है. और कई जगह वैक्सीन उपलब्ध न होने की वजह से सेंटर पर ताला भी लटका मिला।

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