सिर्फ 10 रुपये ने बदल दी मंगलू राम की ज़िन्दगी, जानिए क्या है पूरा मामला…

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हर कोई पैसा कमाना चाहता है ये लाज़मी भी है कि लगभग हर कोई अपने परिवार को खुश रहना ही चाहता है वरना पैसों का जीवन मे इतना ज्यादा महत्व न होता, हालांकि पैसा कमाना बहुत आसान है बस इस आसान सी कोशिश कोई करना नहीं चाहता सबको शॉर्टकट चाहिए लेकिन कोई ये नहीं समझना चाहता कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता मंज़िल पाने के लिए भटकना ही पड़ता है.

हालांकि जो ये बात समझ जाते हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट रास्ता नहीं होता सफलता के लिए परिश्रम करना ही पड़ता है वो अपनी मंज़िल को पहुच जाते हैं और ये बात तो हर किसी को समझ लेनी चाहिए कि छत पर जाने के लिए सीढियां ही एक रास्ता है जिससे थोड़ी देर लगेगी लेकिन आप शुरक्षित छत पर पहुच जाएंगे.

ऐसे में सिर्फ 10 रुपये ने एक इंसान की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल कर रख दी अब आप ये सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे तो हम आपको बता दें कि ऐसा सम्भव ऐसे हुआ की एक आदमी मंगलू राम जो छत्तीसगढ़ के कोंडागांव का रहने वाला है ये पेशे से किसान हैं और खेती बाड़ी कर अपना जीवन गुज़रते थे लेकिन आज ऐसी किस्मत हो गयी है उनकी मेहनत की वजह से की अपने गांव के बाकी किसानों के आदर्श बन गए हैं आइये जानते हैं कैसे.

मंगलू राम के छोटे भाई जो काफी पढ़े लिखे हैं उन्हें नौकरी नहीं मिल रही थी जिसके बाद उन्होंने अपने जीवन मे वापस खेती करने का मन बनाया हालांकि उसी दौरान वो हैदराबाद से 10 रुपये में 2 केचुआ ले आये थे अपने साथ. जिसके बाद मंगलू राम ने अपना दिमाग दौड़ाया और उसी केंचुए से जैविक खेती शुर कर दी 15 साल बाद आज मंगलू राम इस काम मे माहिर और पूरे गांव के आदर्श बने हुए हैं।

केशकाल क्षेत्र के भंडारवंडी जैसे छोटे से गांव के किसान मंगलू राम ने फ़र्टिलाइजर-खाद के युग में जैविक खेती करने की सोची 15 साल पहले उन्होंने हैदराबाद से दस रुपये में दो केंचुआ खरीदा था. अब जैविक खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि आज खाद्य और यूरिया के साथ खेतों में केमिकल डालकर खेती की जाती है जिसकी वजह से न तो अनाज ही शुद्ध रहता है और न ही ज़मीन ही ज़्यादा उपजाऊ रह पाती है ऐसे में जैविक खेती करके दोनो ऊ शुरक्षित रखा जा सकता है.

हमारा इको-सिस्टम भी मज़बूत रहेगा.

मंगलू राम का कहना है कि जैविक खाद्य का इस्तेमाल करके हम अपने इको-सिस्टम को भी शुरक्षित रख सकते हैं, हालांकि साथ ही मंगलू राम ने ये भी बताया कि खाद्य सुरक्षा धिकारियों और किसान कार्यालय के सभी अधिकारियों ने खेती में उनका बहुत सहयोग किया है जिसकी वजह से आज पूरे गांव में मंगलू राम जैविक खेती के लिए जाने जाते हैं.

500 रुपया किलो बेचते हैं केचुआ.

न खुद जैविक खेती करते हैं मंगलू राम बल्कि अपने साथ पूरे गांव को भी इसकी सलाह देते हैं कि लोग शुद्ध भोजन पा सकें भूमि पहले की तरह उपजाऊ रह सके इसके लिए मंगलू राम केंचुए को बाकी लोगों को 500 रुपया किलो बेचते हैं वहीं गांव के बाकी लोगों का कहना है कि मंगलू राम से ही वो लोग केचुआ लेते हैं जिसके बाद वो खुद भी जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं.

आज मंगलू राम अपने गांव के लोगों में आदर्श बने हुए हैं लोग उनसे खेती के कई बारीकियां सीख रहे हैं किसान सुरक्षा अधिकारी भी उनकी सहायता करते हैं उन्हें गर्व है मंगलू राम जैसे लोगों पर.

नोट:- यह खबर इंटरनेट की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार तैयार की गई है। इसकी पुष्टि Air News Live नहीं करता।

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