मंगल ग्रह पर जीवन संभव , इस प्रकार से मिली पानी की आहट देखे कुछ तस्वीरें , वैज्ञानिकों ने बताया…

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मंगल ग्रह पर जीवन की खोज करने में वैज्ञानिक कई सालों से लगे हैं जीवन की इस खोज में सबसे बड़ा कामयाबी उन्हें पानी की खोज में मिला है और पिछले 3 साल पहले पुष्टि करते हुए वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर कई झीलों के होने की संभावना व्यक्त किया था.और इसी राह पर चलते हुए उन्हें एक और कामयाबी मिली है जिसका उन्हें अनुमान है कि मंगल ग्रह की सतह के नीचे कुछ मील से कम दूरी में दर्जनों झील और अधिक मात्रा में पानी है।

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पानी की दर्जनों झीलों का पता लगाकर वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर जीवन की उम्मीद को और बढ़ाया.

नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेट्री के शोधकर्ताओं ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मार्च एक्सप्रेस ऑर्बिटर के डाटा का विश्लेषण किया और 2018 में की गई खोज के समान मार्टियन दक्षिणी ध्रुव के आसपास दर्जनों रडार रिफ्लेक्शन को खोजने में कामयाबी हासिल की है। मंगल पर दक्षिणी ध्रुवीय स्तरीय क्षेत्र है जहां पर विज्ञान को लगता है कि वहां बर्फ का भंडार अधिक मात्रा में हैं रिसर्च सामने आया है.

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यहाँ लाखों वर्षों से बर्फ का भंडार मंगल ग्रह पर मौजूद है वहां पानी तरल अवस्था में रह ही नहीं सकता क्योंकि वहां ज्यादा ही ठंड होती है। बर्फ के भंडार के बीच में खनिजों का पता चला है इस बात से वैज्ञानिक काफी आश्चर्य में हैं रिसर्च करने वाली टीम ने बताया है कि अभी हम अनुमान लगा रहे हैं कि मंगल ग्रह की सतह के नीचे या तो तरल पानी हो सकता है या फिर मंगल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर जो संकेत मिले वह किसी और चीज के हैं रिसर्च रिपोर्ट की माने तो वैज्ञानियों को लगता है कि मंगल ग्रह के बीच अरबों साल पुरानी चट्टान है।

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जिन्होंने अभी तक पानी को इक्ट्ठा कर के रखा है। अनुमानित तापमान लगभग 0 से 1 डिग्री फॉरेनहाइट है जो पानी को तरल रहने के लिए बहुत ठंडा होगा। एरीजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर छात्र आदित्य खुल्लर के मुताबिक जिस क्षेत्र में पानी तरल के रूप में है वह दक्षिण ध्रुव से सिर्फ 12 मील की दूरी पर है खुल्लर के अनुसार उस स्थान पर ज्वालामुखी गतिविधि भी हो सकती हैं या फिर और भी कुछ चीजें प्राप्त हो सकती हैं खुल्लर के अनुसार मौजूदा हालात में ज्वालामुखी के होने का वास्तविक कोई सबूत अभी नहीं मिले हैं ऐसा केवल अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं मई में शोधकर्ता ने मंगल ग्रह की सैटेलाइट तस्वीरों में ज्वालामुखी की खोज की थी 50हजार सालों में हुए विस्फोटों को दर्शाता है यदि यह ज्वालामुखी एक्टिव नहीं है और पानी वास्तव में तरल है तो शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके मूल कारण का पता लगाने के लिए और अध्ययन की आवश्यकता है।जिससे मंगल ग्रह पर जीवन की खोज को नया आयाम मिलेगा।

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