400 साल पहले बर्फ में दबे होने से लेकर अब तक का बाबा केदारनाथ के मंदिर का सफर जानिए, आइये देखते है इनकी कुछ अनदेखी तस्वीरें ।

केदारनाथ मंदिर जहाँ बाबा बर्फानी का वास होता है यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में सम्मिलित है इस मंदिर की अत्यधिक मान्यता है। हर रोज़ यहाँ लाखों श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है यह मंदिर उत्तराखंड के हिमालय पर्वत की गोद में स्थित है। लेकिन इसके पीछे का इतिहास आप नहीं जानते, हम आपको इस मंदिर के 400 साल के इतिहास के बारे में बताएंगे, और इन तस्वीरों में दिखाएंगे।

KEDARNATH
केदारनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में सम्मिलित होने के साथ-साथ पंचकेदार में से एक भी है। यहां पर बहुत अधिक बर्फ के कारण मंदिर अप्रैल से नवंबर महीने के बीच ही खुला रहता है। मंदिर का निर्माण कत्युरी शैली से किया गया है। ऐसा माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण पांडव वंश के राजा जन्मयजन ने कराया था। स्वयंभू शिवलिंग अतिप्राचीन है, ऐसा कहा जाता है की, आदिशंकराचार्य ने इस मंदिर का जीणोद्धार 8वी सदी में करवाया था। केदारनाथ मंदिर समुंद्र तल से 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

बर्फ में दबा रहा मंदिर 400 सालों तक

वैज्ञानिकों के अनुसार कथनानुसार केदारनाथ का मंदिर 400 सालों तक बर्फ में दबा रहा, इसके बाद भी यह मंदिर सुरक्षित है। 2013 में जलप्रलय के दौरान इस मंदिर के सुरक्षित रह जाने से वैज्ञानिकों को कोई हैरानी नहीं हुई। वैज्ञानिक विजय जोशी के द्वारा बताया गया की मंदिर 400 साल तक केदारनाथ के बर्फ में दबे होने के बावजूद जब बर्फ पीछे हटी तो हटने के निशान मंदिर में मौजूद थे। इसकी जाँच वैज्ञानिकों द्वारा की गयी जिससे यह साफ हुआ की यह मंदिर 400 साल तक बर्फ में दबा रहा।

चोराबारी ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी केदार नगरी

देहरादून के वाडिया इंस्टिट्यूट द्वारा बताया गया कि केदारनाथ इलाके की लाइकोनोमेट्रिक डेटिंग भी की गयी है, यह एक ऐसी तकनीक है जिसमे शैवाल और उसके कवक को मिलाकर उनके समय का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके माध्यम से इस नगरी की जाँच की गयी जिसमे यह पाया गया की यह नगरी 400 साल पहले से थी और चोराबारी ग्लेशियर के पिघलने के बाद यह सामने आयी है।

KDARNATH

इलाके में ग्लेशियर का निर्माण 14वीं सदी के मध्य में शुरु हुआ। जो 1748ईस्वी तक जारी रहा। जब ग्लेशियर पीछे हटते है तो रोड रोलर की तरह अपने नीचे की सारी चट्टानों को पीस देते हैं। यहां पर मंदिर का निर्माण करना बेहतरीन इंजीनियरिंग का एक नमूना है। मंदिर को इस मजबूती से बनाया गया की यह आज भी उतना ही सुरक्षित है। मंदिर की दीवारे 12 फिट मोटाई वाले पत्थरो से बनाई गयी है।

 

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