जिस बेटे को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहती थी इंदिरा गांधी, उसी बेटे ने मारा थप्पड़……जानिए क्या है सच्चाई

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‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने जब 70 के दशक में यह खबर छापी कि संजय गांधी ने एक कार्यक्रम में मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री को थप्पड़ मारा इस बात की चर्चा अभी लोग करते हैं लेकिन क्या वाकई ऐसा हुआ इसमें कितनी सच्चाई है

इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी

संजय गांधी का जन्म 14 दिसंबर 1946 को दिल्ली में हुआ था उन्हें देश के भविष्य का प्रधानमंत्री माना जा रहा था। इंदिरा गांधी उन्हें उत्तराधिकारी के तौर पर तैयार कर रही थी हालांकि मां के साथ उनके बर्ताव को लेकर तमाम तरह के अटकलें लगाई जाती थी। परिवार के छोटे बेटे संजय गांधी 23 जून 1980 को जब वह दिल्ली में एक छोटे विमान को उड़ा रहे थे तभी यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया उसमें संजय गांधी का निधन हो गया।

संजय गांधी का राजनीतिक सफर

संजय गांधी को लेकर उनके राजनीतिक सफर में बहुत चर्चाएं हुआ करती थी। 70 के दशक में जब देश में आपातकालीन घोषित किया गया। तब वह ताकतवर शख्स बन कर उभरे। तब कई राज्यों में कांग्रेस के मुख्यमंत्री उनके इशारों पर बदल दिए जाते थे। संजय तब जितने ताकतवर बनकर उभरे ,उतने विवादास्पद भी रहे।

संजय गांधी से जुड़ी विवादास्पद खबर

वाशिंगटन पोस्ट ने जब 70 के दशक में यह खबर छपी कि संजय गांधी ने एक कार्यक्रम में अपनी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री को थप्पड़ मारा। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली। विदेशी अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने इस रिपोर्ट को छापा। भारत ने अपने अखबारों में इस खबर को प्रकाशित करने नहीं दिया क्योंकि उस समय आपातकाल लागू था।
आपातकाल के समय मीडिया की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया जाता है। मीडिया वही छाप सकती है जो सरकार कहेंगी।

भारतीय जर्नलिस्क कूमी कपूर ने से खबर पर उठाए सवाल

सीनियर जर्नलिस्ट कूमी कपूर ने इस आर्टिकल पर सवाल उठाया और अपनी किताब “द इमर्जेंसी-ए पर्सनल हिस्ट्री” में इसका उल्लेख किया।क्या आपको अंदाज था कि आप जो छाप रहे हैं, उसका क्या असर होने वाला है. जवाब में “वाशिंगटन पोस्ट” के पत्रकार ने कहा, “बेशक मुझको अंदाज है कि भारतीय लोग गॉसिप कितना पसंद करते है। “न्यूयार्कर मैगजीन” में वेद मेहता जैसे गंभीर लेखक ने इस पर एक आर्टिकल भी लिखा।

“स्क्रोल” वेबसाइट ने बाद में खबर छापने वाले रिपोर्टर साइमंस से इस बारे में ईमेल पर बात की। तब साइमंस ने बताया कि ये खबर उन्होंने किस आधार पर कैसे छापी, उन्हें इसका पता कैसे लगा।

सवाल:-
स्क्रोल ने पूछा आपने वाशिंगटन पोस्ट में यह स्टोरी छवि बिगाड़ने के लिए छापी तो आपने सूत्र का नाम नहीं दिया? यह घटना कब हुई संजय ने ऐसा क्यों किया?

जवाब:-
साइमंस ने जवाब में लिखा है यह घटना आपातकाल लागू होने से पहले एक प्राइवेट पार्टी में हुई। मैंने इसको तुरंत नहीं लिखा बल्कि इसे रख लिया कि बाद में छापूंगा। संजय क्यों नाराज हुए थे यह बात अब मुझे याद नहीं है। आखिर इतना लंबा समय बीत चुका है। खबर आपातकाल घोषित होने से एक शाम पहले की थी।

सवाल:-
यह खबर उन्हें सूत्र से पता चला या वहां वे खुद मौजूद थे या फिर ऐसे ही बात निकल गई।

जवाब:-
इसके 2 सूत्र थे। दो लोग जो एक दूसरे को जानते थे और इस पार्टी में थे। इसमें से एक ने यह बात मेरी पत्नी को घर आने के दौरान बताइए दूसरे सूत्र ने भी इसे कंफर्म किया।

सवाल:-
क्या सूत्रों से भारत में या विदेश में मिले, आपातकाल उठाए जाने के बाद.

जवाब:-
हां हम आपातकाल के पहले और बाद में कई बार मिले।

सवाल:-
क्या कभी आप अपने इस सूत्र की पहचान उजागर करेंगे?

जवाब:-
नहीं इसका मेरा कोई इरादा नहीं है. मैंने उसे अपनी जुबान दी हुई है कि ऐसा नहीं होगा, मैं वादे का पक्का हूं। एक विश्वसनीय पत्रकार और शख्स के तौर पर ऐसा करना जरूरी भी होता है।

सवाल:-
क्या आप अभी सूत्र के संपर्क में है?

जवाब:-
हां

सवाल:-
जब यह स्टोरी अपने वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित की तो, आप से देश छोड़कर जाने को कहा गया तो क्या आपको अंदाज था? कि ऐसा होगा।

जवाब:-
मुझे देश छोड़ने के लिए नहीं कहा गया। मुझे 5 घंटे की नोटिस पर ऐसा करने का आर्डर दिया गया हालांकि इसका मेरी स्टोरी से कोई लेना-देना नहीं था क्योंकि उसको मैंने तब तक लिखा ही नहीं था. बल्कि यह मेरी उस स्टोरी पर पर था जिसमें मैंने कई आर्मी ऑफिसरों के हवाले से लिखा है कि वह आपातकाल लागू करने के इंदिरा गांधी के फैसले से खुश नहीं है। मुझे उस दिन गिरफ्तार कर लिया गया।

5 घंटे बाद मुझे अमेरिकी दूतावास अधिकारी को एयरपोर्ट पर सौंप दिया गया। एमीग्रेशन अफसर ने मेरी सारी नोटबुक्स जब्त कर लीं। कई महीने बाद नोटबुक्स मुझे लौटाए गए। मुझे बैंकाक जाने वाले एक प्लेन पर बिठाया गया। वहां मैं एक होटल रूम में ठहरा. वहीं मैंने थप्पड़ की घटना वाली स्टोरी लिखी।

सवाल:-
क्या आपकी इसके बाद सूत्र या उनके परिवार में किसी से मुलाकात हुई?

जवाब:-
आपातकाल के बाद मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री बनते ही मुझको और एक ब्रिटिश जर्नलिस्ट को वापस बुला लिया। मैं तब इंदिरा गांधी से भी मिला लेकिन मैंने उनको ये नहीं बताया कि वह स्टोरी मैंने लिखी है लेकिन एक अन्य प्राइवेट पार्टी में राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया आए हुए थे। वहां सबके सामने यह कहा गया कि वह थप्पड़ की स्टोरी लिखने वाला पत्रकार कोई और नहीं मैं ही हूं। तब राजीव गांधी जी मेरी ओर देखे और मुस्कुराने लगे उन्होंने कुछ नहीं कहा सोनिया जरूर कुछ नाराज लग रही थी लेकिन उन्होंने भी कुछ कहा नहीं।

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