अखिर क्यों कोबरा कमांडो यूनिट का हिस्सा बनने से क्यों कतरा रहे जवान, युवा अफसर नहीं मिले तो 48 साल तक बढ़ाई आयु सीमा

coronaa

कोबरा कमांडो सीआरपीएफ की एक स्पेशल यूनिट है।12 सितम्बर 2008 को इस स्पेशल यूनिट का गठन हुआ।
सीआरपीएफ ने यह बात मानी है कि कोबरा बटालियन के वांछित आयु वर्ग में अफसरों की कमी हो गई है। कोबरा फोर्स ज्वाइन करने की निर्धारित आयु को बढ़ाना पड़ रहा है। पहले कोबरा में आने की तय आयु 30-35 साल होती थी, अब उसे 48 वर्ष तक बढ़ा दिया है।

जंगल युद्ध कला में महारत रखने वाले सीआरपीएफ के ‘कोबरा’ कमांडो कई तरह के मुकाबले में अमेरिकी मैरीन कमांडोज को भी पीछे छोड़ चुके हैं। जैसे जंगल में 45 किलोमीटर की दूरी तय करने में मरीन कमांडो 18.9 घंटे का समय लेते हैं, जबकि कोबरा कमांडो वह दूरी 15 घंटे में पूरी कर रहे हैं। पहले सीआरपीएफ अफसरों और जवानों में ‘कोबरा’ इकाई का हिस्सा बनने के लिए होड़ लगी रहती थी। अब उनमें वैसा जोश नहीं है। नए अफसर और जवान, कोबरा में आने से कतराने लगे हैं।
कोबरा कमांडो गोरिल्ला टेक्नीक्स और हाइली पावरफुल हथियारों से लैस होते हैं।

कोबरा फोर्स ज्वाइन करने की निर्धारित आयु को बढ़ाना पड़ रहा है। पहले कोबरा में आने की तय आयु 30-35 साल होती थी, अब उसे 48 वर्ष तक बढ़ा दिया है। इससे फोर्स का ‘यंग प्रोफाइल’ ढांचा बिगड़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top