सरकारी नौकरी करने वाले पिता ने मृत बेटी के लिए खड़ी कर दी भारत की बड़ी ‘निरमा’ कंपनी

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हम निरमा सर्फ़ को सभी जानते है। इसका उपयोग आज लगभग सभी घरो में किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है, की निरमा की शुरुआत कैसे हुए है। आज हम आपको इसके पीछे की पूरी कहानी बताने जा रहे है की किस तरह से एक सरकारी नौकरी करने वाले पिता ने अपनी बेटी की मृत्यु के बाद उसके नाम पर एक बड़ी कम्पनी बनाई।
यदि इंसान की सोच बड़ी है, तो उसके सामने कोई भी चुनौती बड़ी या छोटी नहीं होती है। गुजरात की ज़मीन से उठे व्यापारियों की सबसे खास बात यह है कि इन्हे व्यापर के सही मायने पता है। यह किसी भी व्यापर में पीछे नहीं रहते है। उसके लिए भले हि इन्हें छोटी-मोटी नौकरी करनी पड़े या गली-गली घूमकर अपने प्रोडक्ट को बेचना पड़े यह सभी कुछ करने के लिए त्यार रहते है। आज हम आपको गुजरात के एक ऐसे ही इंसान की कहानी बताएंगे जिसने अपने एक सपने को पूरा करने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी, और एक बड़ी कम्पनी को खड़ा किया।
निरमा की शुरुआत किसने की
1969 में केवल एक व्यक्ति द्वारा शुरू निरमा कंपनी की शुरुआत की गयी। इसको शुरू करने वाले करसनभाई पटेल है। इनका जन्म 13 अप्रैल 1944 को गुजरात के मेहसाणा शहर के एक किसान परिवार में हुआ था। यह बचपन में एक सामान्य परिवार से थे। पटेल के पिता खोड़ी दास पटेल एक बेहद साधारण इंसान थे, लेकिन इसके बावजूद उनके बेटे को अच्छी शिक्षा दी। 21 साल की उम्र में इन्होंने रसायन शास्त्र में बी.एस.सी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद इन्होने घर खर्च उठाने के लिए नोकी की, लेकिन यह शुरुर से अपना व्यवसाय करना चाहते थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक प्रयोगशाला में सहायक यानी लैब असिस्टेंट की नौकरी की। इसके बाद उन्होंने गुजरात सरकार में खनन और भूविज्ञान विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई।
आज इनकी कम्पनी में लगभग 18000 लोग काम करते हैं और इस कंपनी का टर्नओवर 70000 करोड़ सालना है। यह एक वाशिंग पाउडर कम्पनी को चलाते है, जिसका नाम ‘निरमा’ है। निरमा वॉशिंग पाउडर ने किस तरह से बाज़ार में अपनी जगह बनाई है इसे हम सभी जानते है।
वो हादसा जिसने बदल दी ज़िंदगी
करसन भाई ने निरमा की शुरुआत ऐसे ही नहीं की उनकी इस शुरुआत के पीछे एक घटना है। करसन भाई की ज़िंदगी अच्छी कट रही थी, और वह एक सामान्य जीवन जी रहे थे। उनके मन में कुछ बेहतर करने की ख्वाहिश हमेशा थी। करसन पटेल अपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे. वह उनकी बेटी को पढ़ा लिखकर एक बड़ा बनाना चाहते है, जिससे पुरे देश में उसका नाम हो। लेकिन ऐसा नहीं हुआ जब वह स्कूल में पढ़ती थी तभी एक हादसे में उसकी मौत हो गई। एक सुबह करसन भाई को एक ऐसा उपाय सूझा जिससे वह अपनी बेटी को वापस ला सकते थे, उनकी बेटी का नाम निरुपमा था और प्यार से सब उसे निरमा कहते थे। उन्होंने खुद से वाशिंग पाउडर बना कर बेचने का फैसला किया और उसका नाम अपनी बेटी के नाम पर रखने का फैसला लिया। इस तरह करसन पटेल ने अपने इस Product का नाम ‘निरमा’ रखा।
हेमा रेखा जया और सुषमा… सबकी पसंद…”
हेमा रेखा जया और सुषमा… सबकी पसंद…” यह लाइन हमने बचपन से कई बार टीवी में आने वाले ऐड में सुनी है। इसके पीछे की कहानी को हम आपको बतायेगे। गुजरात के अहमदाबाद के एक शख्स ने अपने घर के पीछे डिटर्जेंट पाउडर बनाना शुरू किया था, जिसको पॉपुलर करने के लिए इस लाइन का उपयोग किया गया था। शुरुआत में सर्फ बनाने के बाद वह इसे घर घर घर जा कर बेचा करता था, इसके साथ ही डिटर्जेंट पाउडर के हर पैकेट के साथ ये गारंटी भी दी जाती थी, कि अगर सही ना हुआ तो वह पैसे वापस कर देगा. उस समय मार्किट में मिलने वाले सर्फ की कीमत 13 रुपये किलो थी, मगर यह सर्फ मात्र 3 रुपये किलो दाम पर बेचा जाता था।
इस तरह से बना सबकी पसंद निरमा’
करसन पटेल ने अपने प्रोडक्ट की बिक्री बढ़ने के लिए शुरूआत में काफी सयम तक टीवी में विज्ञापन चलाये। उन्होंने इसके लिए असरदार जिंगल का सहारा लिया | इस विज्ञापन के बाद निरमा खरीदने के लिए लोग दुकान पर पहुंचने लगे लेकिन, करसन पटेल को अपने प्रोडक्ट की सप्लाई मार्केट में बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन चालाकी दिखाते हुए 90% स्टॉक वापस ले लिए। विक्रेताओं ने जब आपूर्ति के लिए करसन भाई से निरमा सर्फ देने के लिए अनुरोध किया एक महीने बाद बाज़ार में निरमा सर्फ को उतरा गया। इसके बाद निरमा ने बड़े अंतर से कई सर्फ को हुए देश में अपनई एक अलग पहचान बनाई और आज भी इस सर्फ को लोग काफी पसंद करते है।

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