भारत की पहली लेफ्टिनेंट पायलट हरिता कौर देओल, जानिए इनकी सफलता की कहानी…

first indian woman pilot

आज के समय में समय के साथ हालात बदल रहे हैं। इसके बावजूद महिलाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए संघर्ष करना ही पड़ता है, कितना भी समाज आगे क्यों न बढ़ जाए लेकिन महिलाओं के लिए संघर्ष खत्म नहीं होता है। इन्हीं संघर्षों के बीच में महिलाएं भी अपनी प्रतिभा को लोगों के सामने प्रस्तुत भी कर रही हैं। ऐसी ही एक जांबाज महिला हरिता कौर देओल की कहानी है। हरिता हर महिला के लिए प्रेरणा है। 1992 में हरिता कौर भारतीय वायु सेना से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन महज 2 साल ही में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। प्लेन क्रैश में उनकी मृत्यु हो गई थी।

पहली महिला को वायुसेना में मिला अवसर

भारतीय सेना में यह पहली बार हुआ जब किसी महिला को मौका मिला। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने वायु सेना में पहली बार महिलाओं के लिए अवसर दिए और इस अवसर का पूरा लाभ हरिता कौर ने लिया।

हरिता कौर देओल

चंडीगढ़ के एक सिख परिवार में हरिता का जन्म हुआ और वह अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी। हरिता का बचपन से ही सपना था कि वह भारतीय वायु सेना का हिस्सा बने। हरिता के पिता भारतीय सेना में कर्नल थे। जिसकी वजह से वह अपनी बेटी को पूरी शिक्षा दे पाए। वायु सेना अकादमी में प्रारंभिक ट्रेनिंग में प्रवेश करने वाली महिला हरिता पूरी ट्रेनिंग करने के बाद हैदराबाद के डंडीगुल के येलहंका वायु सेना स्टेशन में एअरलिफ्ट कोर्स प्रशिक्षण प्रतिष्ठान में ट्रेनिंग ली।

हरिता ने 1 हजार फीट की ऊंचाई तक प्लेन अकेले उड़ाया।

22 साल की उम्र में हरिता ने कठिन ट्रेनिंग लेने के बाद 2 सितंबर 1994 को Avro Hs-748 प्लेन को 1 हजार फीट की ऊंचाई तक अकेले उड़ाया सामान्यता वायु सेना के प्लेन में को पायलट की मौजूद रहते हैं लेकिन पहली बार हुआ कि किसी महिला ने वायुसेना के विमान को अकेले ही इतनी ऊंचाई पर उड़ाने में कामयाब रहे यह पल अपने आप में ही एक गौरवपूर्ण क्षण था

हरिता कौर की जिंदगी का यह सबसे यादगार होने के साथ ही उनके ट्रेनिंग ऑफिसर के लिए भी यह गर्व की बात थी। उनके इस प्रदर्शन से उनके पिता को भी अपनी बेटी पर गर्व था। साथ ही हरिता की बहुत खुश थी। इस जीत का जश्न अपने दोस्तों के साथ छुट्टियों में मनाया।

24 दिसंबर 1996 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर वायु सेना के विमान क्रैश हो गई। उसमें मौजूद 24 मेंबर की मृत्यु हो गई, जिसमें हरिता कौर देओल भी शामिल थी।

पिता ने अपनी बेटी पर गर्व करते हुए कहा कि मेरी बेटी निडर थी। उनकी मां कमलजीत कौर जब भी अपनी बेटी को याद करती हैं उनकी आंखें भर आती हैं। मां का कहना है कि वक्त ने उन्हें हमसे पहले ही छीन लिया। वह मेरा बहुत ख्याल रखती थी। मुझे उस पर गर्व होता है।उसने पहली लेफ्टिनेंट पायलट बनकर हमारा नाम पूरे देश में रोशन किया।

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