दिलीप कुमार की वो आखिरी फ़िल्म.

11 दिसंबर 1922 को पेशावर ( अब पाकिस्तान में ) जन्मे यूसुफ खान जिन्हें दुनिया आज दिलीप कुमार के नाम से जानती है, जो बेहतरीन अदाकारी के मालिक भी हैं उनका निभाया हुआ हर किरदार बेहतरीन में गिना जाता है.

अक्सर दिलीप साहब को लेके एक अफवाह ट्रोलर्स द्वारा फैलाई जाती है कि दिलीप साहब हमें अलविदा कह गए लेकिन ऐसा नहीं है दिलीप साहब जैसी सख्सियत बेहतरीन मिजाज़ के मालिक भगवान उन्हें सलामत रखें उनकी पत्नी शायरा बानो जो दिलीप साहब से पूरे 22 साल छोटी हैं. जब दिलीप साहब 44 के थे तब शायरा बानो 22 की थी उस वक़्त दिलीप साहब ने शादी की थी और आज तक दिलीप साहब के साथ शायरा बानो हैं और उनका पूरा ख्याल रखती हैं कहा जाता है और कई बार खुद दिलीप साहब ने कहा है कि शायरा बानो सिर्फ पत्नी ही नहीं बल्कि उनकी हमराज़ भी हैं,

लोग दिलीप साहब के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं ऐसी कोई जगह नहीं जहां दिलीप साहब की जिंदगी के बारे में अच्छे से जाना जा सके लेकिन अब दिलीप साहब ने खुद एक किताब लिखी है जिसका नाम है “The Substance And The Shadow” जिसमे दिलीप साहब की वो बातें हैं जिसे हम कभी नहीं जान पाते एक उम्र में जब इंसान सारी बातें भूल जाता है खास करके उस वक़्त जब ऐसी किसी बीमारी से ग्रसित हो जिसमे 1 मिनट पहले की बातें कभी-कभी याद नहीं रहती उस उम्र में दिलीप साहब ने एक किताब लिखी जिसमे अपने जीवन का हर वो सच लिखा है जिसे दुनिया शायद कभी न जान पाती अगर उन्होंने इस किताब में न लिखा होता तो.

दिलीप साहब ने दुनिया वालों की नज़र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है, दिलीप साहब को बॉलीवुड के लोगों ने “ट्रेजडी किंग” का ख़िताब दिया हुआ है दिसंबर 2022 में दिलीप साहब अपने 100 साल पूरे कर लेंगे. दिलीप साहब की आखिरी फ़िल्म किला थी किला फ़िल्म में आखिरी बार नज़र आये थे.

दिलीप साहब के करीबी

दिलीप साहब हमेशा अपनी बातों में कई बड़े कलाकारों का नाम लेते रहते हैं जिसमे अमिताभ बच्चन, आमिर खान, शाहरुख खान और ऐसे कई दिग्गज लोगों की बातें दिलीप साहब बताते हैं. ये वो लोग हैं जो दिलीप साहब के दिल के करीब हैं जो दिलीप साहब के हर सुख-दुख को देखने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और दिलीप साहब की बहोत इज़्ज़त करते हैं.

हिट फिल्मों के मामले में दिलीप साहब को “रिकॉर्ड होल्डर” का भी खिताब दिया गया है. दिलीप कुमार की बेहतरीन फिल्में तो सब हैं लेकिन उनमें भी सबसे ऊपर रखी कुछ फिल्में जैसे नया दौर, मुग़ले-आज़म, शक्ति, देवदास, हालांकि उनकी पहली फ़िल्म 1944 में ज्वार भाटा थी जो बॉक्स आफिस पर बहोत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी 1947 में उनकी फिल्म नूर जहां ने दिलीप साहब की एक अलग पहचान बना दी ऐसी तमाम फिल्में जिसने एक रिकॉर्ड होल्ड किया हुआ है, उन्होंने 65 ज़्यादा फिल्मों में काम किया है

दिलीप साहब को मिले अवार्ड्स.

दिलीप साहब को भारतीय सिनेमा जगत का सबसे बड़ा दादा साहब फाल्के अवार्ड, 8 फ़िल्मफ़ेअर, पद्म भूषण से नवाज़ा गया है और साथ ही साथ उन्हें 1994 में पाकिस्तान से निशान-ए-हिन्द के अवार्ड से भी नवाज़ा गया है।

बाते सुनी-अनसुनी

दिलीप साहब के बारे में सुना जाता है कि उनकी एक फ़िल्म है जिसका नाम कफन-दफन है जो बन के तैयार है वो फ़िल्म दिलीप साहब की असल जिंदगी से जुड़ी हुई है फ़िल्म का नाम कफन-दफन इसलिए है कि दिलीप साहब की ज़िंदगी खत्म और उस फ़िल्म की कहानी खत्म लेकिन इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है कि जिसमे ये कहा जा सके की ऐसी कोई फ़िल्म दिलीप साहब ने बनाई है।

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