ताकि बची रहे धरती… तो ये है चीन का महाप्लान, 900 टन की रॉकेट फौज-ऐस्टरॉइड की टक्कर…

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चीन ने धरती को ऐस्‍टरॉइड के टक्‍कर से बचाने के लिए महाप्‍लान पर काम करना शुरू कर चुका है। दुनियाभर के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर धरती से ऐस्‍टरॉइड टकराता है तो महाप्रलय आ जाएगा। माना जाता है कि ऐसी ही एक टक्‍कर में धरती से विशाल डायनासोर विलुप्‍त हो गए थे। इसी खतरे को देखते हुए चीन के नेशनल स्‍पेस साइंस सेंटर ने रॉकेट की फौज तैयार करने की योजना पेश की है। इसके तहत 900 टन वजनी इस रॉकेट की फौज को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा ताकि ऐस्‍टरॉइड को धरती की कक्षा से दूर रखने का अभ्‍यास किया जा सके। चीन ने इस योजना को वर्ष 2031 तक पूरी कर, लागू करने का मन बनाया है। चीनी वैज्ञानिकों के निशाने पर ऐस्‍टरॉइड बेनू है जो 1614 फुट चौड़ा है और यह साल 2175 से 2199 के बीच धरती से मात्र 75 लाख किमी की दूरी से गुजरेगा। आइए जानते हैं क्‍या चीनी वैज्ञानिकों का पूरा प्‍लान….

ऐस्‍टरॉइड पर 23 बार रॉकेट हमले की योजना

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐस्‍टरॉइड बेनू जब धरती की ओर आएगा तब उसके टकराने की आशंका 2700 में एक बार रहेगी। इस ऐस्‍टरॉइड को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने संभावित खतरनाक अंतरिक्ष चट्टान की श्रेणी में रखा हुआ है। चीन का अनुमान है कि एक के बाद एक अगर ‘लॉन्‍ग मार्च 5’ रॉकेट से 23 बार प्रहार किया जाए तो इस ऐस्‍टरॉइड को धरती की कक्षा से 5592 मील दूर ढकेला जा सकता है। यह दैत्‍याकार रॉकेट 900 टन वजनी है। यह धरती के त्रिज्‍या के 1.4 गुने के बराबर है। चीन के नेशनल स्‍पेस साइंस सेंटर के वैज्ञान‍िक और पेपर के मुख्‍य लेखक मिंगताओ ली ने कहा, ‘ऐस्‍टरॉइड की टक्‍कर धरती पर हर तरह के जीवन के लिए बहुत बड़ा खतरा है।’ उन्‍होंने कहा कि ऐस्‍टरॉइड को उसकी कक्षा से मोड़ना इस खतरे को कम करने के लिए बेहद जरूरी है। इस बीच वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐस्‍टरॉइड बेनू जैसे अंतरिक्ष की चट्टान को टक्‍कर देने के लिए बड़े पैमाने पर गतिज ऊर्जा की जरूरत होगी।

 बेनू पर परमाणु बम गिराना ज्‍यादा अच्‍छा तरीका है?

कई विशेषज्ञों का कहना है कि ऐस्‍टरॉइड को तबाह करने के लिए उसके ऊपर परमाणु हमला किया जाए लेकिन इसमें एक बड़ा खतरा है। अंतरिक्ष की चट्टान कई टुकड़ों में बंट सकती है। इससे उसके धरती से टकराने का खतरा और ज्‍यादा हो जाएगा। हालांकि डॉक्‍टर ‘ली’ कहते हैं कि अगले 10 साल में ऐसी तकनीक का विकास कर लिया जाएगा जिससे बिना परमाणु बम के इस्‍तेमाल के ही इतने विशाल ऐस्‍टरॉइड से धरती की रक्षा की जाएगी। इसी के तहत चीनी वैज्ञानिकों ने प्रस्‍ताव दिया है कि ऐस्‍टरॉइड बेनू की सतह पर लगातार कई बार रॉकेट से टक्‍कर दी जाए। हालांकि ये रॉकेट धरती से करीब 3 साल की यात्रा के बाद ही ऐस्‍टरॉइड बेनू तक पहुंच पाएंगे। प्रत्‍येक ऐसे रॉकेट को उसके ऊपरी हिस्‍से को अलग नहीं करके सुधारा जा सकेगा। इससे उसका ऐस्‍टरॉइड पर प्रहार और ज्‍यादा तेज होगा। चीनी दल ने कहा कि ऐस्‍टरॉइड तक भेजने के लिए लॉन्‍ग मार्च 5 रॉकेट के अंदर बहुत कम सुधार की जरूरत होगी।

​चीन का बदनाम रॉकेट है विशालकाय लॉन्‍ग मार्च 5

चीन का यह विशालकाय रॉकेट हाल ही में अनियंत्रित हो गया था जिससे इसके किसी शहर के ऊपर गिरने का खतरा मंडराने लगा था। हालांकि बाद में यह मालदीव के पास समुद्र में गिरा था। इससे किसी को नुकसान नहीं हुआ। चीन एकमात्र ऐसा देश नहीं है जो एक ऐस्‍टरॉइड का रास्‍ता बदलने की दिशा में काम कर रहा है। अमेरिका अपने HAMMER प्‍लान से स्‍पेसक्राफ्ट या परमाणु बम के जरिए ऐस्‍टरॉइड का रास्‍ता बदलने की दिशा में प्रयासरत है। नासा का मानना है कि 34 से 53 बार HAMMER से ऐस्‍टरॉइड पर हमले करने होंगे। उसने कहा कि ये हमले धरती से उसकी टक्‍कर की आशंका से 10 साल पहले करने होंगे। इससे ऐस्‍टरॉइड दूसरे परिक्रमा पथ में चला जाएगा। चीनी वैज्ञानिकों का पूरा शोध ‘जर्नल इकारस’ में प्रकाशित हुआ है। बता दें कि धरती की उत्पत्ति कैसे हुई और जीवन कैसे शुरू हुआ, इस तरह के सवालों के जवाब खोजने के लिए “OSIRIS-REX” स्पेसक्राफ्ट 2018 में ऐस्टरॉइड Bennu पर पहुंचा था। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने कई साल इस ऐस्टरॉइड को स्टडी किया और पिछले साल अक्टूबर में सैंपल भी ले लिया। अब यह स्पेसक्राफ्ट इतिहास रचते हुए धरती पर लौट रहा है। यह दो साल का सफर तय करके धरती पर लौट आएगा।

हालांकि 2175 से 2199 तक ये एस्टरॉइड के टकराने की संभावना है और ये वर्ष हमसे अभी कोषो दूर है। लेकिन चीन ने दूरअंदेशी पर काम करना शुरू कर दिया है। और जब तक ये एस्टरॉइड पृथ्वी से टकराएगा तब तक हमारे बच्चे भी इसे देख पाएंगे या नहीं इसकी कोई गारेंटी नहीं है। हालांकि इस सैगमेंट पर काम करने वाला चीन ऐसा पहला देश है जो एस्टरॉइड की दिशा बदलने की सोच रखता है।

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