अघोरी बाबाओं के बारे में कुछ अनसुनी कहानी, जिन्हे जानकर हो जायेंगे अचंभित

aghori

बाबाओं में साधु संतो में अघोरी बाबाओं को सबसे श्रेष्ठ मन जाता है। और महादेव का परम भक्त भी माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान शिव भी एक अघोरी हैं इन बाबाओं के रूप विचत्र है इनके पुरे शरीर में भस्म लगा रहता है और उस भस्म को हमेशा ये अपने बदन में लगाए रहते है।

इनके जैसा जीवन व्यतीत करना असंभव है। ये एक बहुत ही कठिन जिंदगी जीना पसंद करते हैं इनका किसी से कोई वास्ता नहीं होता है। न इनका घर होता है और न ही माकन होता है जो अपनी जिंदगी बहुत ही सरल तरीके से जीना पसंद करते हैं ऐसा सिर्फ उन्हें लगता है क्योकि हम तो ऐसा कर नहीं पाएंगे उनके लिए सिर्फ एक ही परिवार होता है। केवल महादेव वही उनके लिए सब कुछ होते हैं सुबह भी वही शाम भी वही होते हैं। न इन्हे भोजन की चिंता होता है। और ना ही वस्त्र का ये हमेशा महादेव की साधना में लीन रहते हैं इनके गले में रुद्राक्ष और कंकाल का माला होता है। जिसे ये साधना में लीन होते वक्त धारण करते हैं। आपको बता दे की अघोरियों की पूजा की जाती है। जिससे फल की भी प्राप्ति होती है।

महादेव के एक अवतार अघोरी भी होता है। अघोरी जल्दी हर किसी को दिखाई नहीं देते ये अपना जीवन एक कुटिया में व्यतीत करते हैं और वहीँ समाधी भी ले लेते हैं कहा जाता है की स्वर्ग की प्राप्ति के लिए अघोरी अपने जिंदगी को महादेव को सौप देते हैं। इनके दरसन के लिए ज्यादातर शिवरात्रि के दिन ये अपने मठ से बाहर निकलते हैं और बाबा भोलेनानाथ की पूजा करते हैं उसी दिन अघोरी बाबाओं के दर्शन किया जाता है। ये अपने पुरे जिंदगी में सिर्फ और सिर्फ महादेव और माँ काली की ही पूजा करते हैं और सभी देवी देवताओं पर ये विस्वाश नहीं रखते हैं।

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